कबीर भजन

    जुलम करणिये जुलम करने से डरया नहीं करते चेतावनी भजन लिरिक्स

    जुलम करणिये जुलम करने से डरया नहीं करते चेतावनी भजन लिरिक्स

    जुलम करणिये जुलम करने से डरया नहीं करते।

    बेईमान विश्वास किसी का, करया नहीं करते टेर ॥

     

    घर में नार खुबारजा होतो घर बस्या नहीं करते।

    बिना तेल बाती के दीपक, चस्या नहीं करते

    समझदार नर बुरे काम में, फंस्या नहीं करते।

    बिनां चूक विद्वान सभां में, हंस्या नहीं करते

    झूठे नर की बातों सें दिल, भरया नहीं करते १ ॥

     

    जुलम ज्यादती ज्यादा दिन तक, चल्या नहीं करते।

    बिना भाग सन्तों के दर्शन, मिल्या नहीं करते

    ऋतु आये बिन पान फूल फल, खिल्या नहीं करते।

    गर्म नीर से गांव कदे भी, जल्या नहीं करते

    शूरवीर अपना प्रण करके,  फिरया नहीं करते ॥२ ॥

     

    धर्म करे से दानी के धन घट्या नहीं करते।

    मूंजी नर के हाथों से धन, बंट्या नहीं करते

    शूरवीर रणभूमी में जा, हटया नहीं करते।

    कायर नर से दुश्मन के सिर कट्या नहीं करते ।।

    अकलमन्द नर अंध कूप में नहीं करते ३ ॥

     

    बिनां ताल स्वर राग रागनी, जच्या नहीं करते।

    जुलम डकेती चोरी के धन, पच्या नहीं करते

    भले आदमी बेईमानी, रच्या नहीं करते।

    घर में भींत पटकले रोला, मच्या नहीं करते

    हरनारायण भजन बिन, कोई नहीं करते ४ ॥

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