रति नाथ भजन

    सतगुरु साहेब बंदा एक है जी हिंदी भजन लिरिक्स

    सतगुरु साहेब बंदा एक है जी हिंदी भजन लिरिक्स

    सतगुरु साहेब बंदा एक है जी

    सतगुरु साहेब बंदा एक है जी
    भोली साधुडा से किस्योड़ी भिरांत म्हारा बीरा रे
    साध रे पियालो रल भेला पिव जी

    धोबिड़ा सा धोव गुरु का कपडा रे
    कोई तन मन साबण ल्याय म्हारा बिरा रे
    तन रे सीला रे मन साबणा रे
    ये तो मैला मैला धुप धुप जाय म्हारा बिरा रे

    काया रे नगरिये में आमली रे
    ज्या पर कोयालड़ी तो करे र किलोल
    कोयलडया रे शबद सुहावना रे
    बे तो उड़ उड़ लागे गुरु के पाँव म्हारा बिरा रे


    काया रे नागरिये में हाटडी रे
    ज्या पर बिणज करे साहूकार म्हारा बिरा रे
    कई तो करोड़ी धज हो चल्या रे
    कई गया ह जमारो हार म्हारा बिरा रे


    सीप रे समन्दरिये में निपजे रे
    कोई मोतिड़ा तो निपजे सीपा माय म्हारा बिरा रे
    बूंद रे पड़ रे हरी के नाम की रे
    कोई लखियो बिरला सा साध म्हारा बिरा रे
    सतगुरु शबद उचारिया रे


    कोई रटीयो साँस म साँस म्हारा बिरा रे
    देव रे डूंगरपुरी बोलिया रे
    जांका सत अमरापुर बास म्हारा बिरा रे
    कृष्णं वन्दे जगत गुरुं


    FAQs (Frequently Asked Questions)

    Q1: "सतगुरु साहेब बंदा एक है जी" का क्या अर्थ है?
    A: इसका भावार्थ है कि आत्मा (बंदा) और परमात्मा (साहेब) दोनों एक ही तत्व हैं। यह भजन अद्वैत ज्ञान और आत्मिक एकता की भावना से प्रेरित है।


    Q2: यह भजन किस परंपरा से संबंधित है?
    A: यह भजन संतमत और निर्गुण भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ है, जैसे कबीर, दादू, रैदास आदि संतों की वाणी।


    Q3: 'सतगुरु' की क्या भूमिका है इस भजन में?
    A: सतगुरु को आत्मज्ञान का दाता माना गया है, जो आत्मा को परमात्मा की पहचान कराता है और भ्रम से बाहर लाता है।


    Q4: यह भजन कहाँ गाया जाता है?
    A: यह भजन प्रायः सत्संग, ध्यान सत्र, भजन संध्या, और संत सम्मेलन में गाया जाता है।


    Q5: क्या यह भजन ध्यान के लिए उपयोगी है?
    A: हाँ, यह भजन ध्यान व आत्मचिंतन के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि यह व्यक्ति को अपने भीतर झाँकने और एकता के भाव को अनुभव करने की प्रेरणा देता है।


    Q6: क्या इस भजन का कोई प्रसिद्ध गायक है?
    A: इसे कई संतवाणी गायक जैसे प्रह्लाद टिपानिया, विजय सोनी, और अन्य लोक कलाकारों द्वारा गाया गया है। यूट्यूब पर इसके विभिन्न संस्करण मिलते हैं।


    Q7: क्या इस भजन का कोई भावार्थ या व्याख्या है?
    A: हाँ, इस भजन की व्याख्या अद्वैत वेदांत और संत साहित्य के अनुसार की जाती है। इसमें बताया गया है कि "जो खोजे सो पावे", और सच्चे गुरु की कृपा से ही यह साक्षात्कार संभव है।

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