प्रभाती भजन

    क्यो गरब करे मन मूरख तु - गंगा माँ के भजन लिरिक्स

    क्यो गरब करे मन मूरख तु - गंगा माँ के भजन लिरिक्स

    गंगा भजन - प्रभाती राग के भजन लिरिक्स    

    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||

    क्यो गरब करे मन मूरख तु,
    जग छोङ के एक दिन जाना है,
    करले कुछ सुकृत जीवन मे,
    ये दुनिया मुसाफिर खाना है,
    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||


    पांच तत्व का बना पींजरा,
    जिसमे एक पंछी बेठा ,
    हरदम लग रहा आना जाना,
    कभी किसी ने नही देखा ,
    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||


    इस तन को मल-मल कर धोया,
    साबुन ओर तेल लगाकर के,
    पर मन का मेल नही धोया कभी,
    राम का नाम जंपा कर के,
    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||

    पत्थर चुनकर महल बनाया,
    दो दिन का ठोर ठिकाना है,
    उठ जाएगी डोली तेरी,
    आखिर शमसान ठीकाना है ,
    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||

    शुभ कर्म करे तो चमन खिले,
    वरना जीवन वीराना है,
    कहे सदानन्द दुनियां वालो,
    फिर आखिर मे पछताना है
    क्यो गरब करे मन मूरख तु || टेर ||

    रचनाकार:- स्वामी सदानन्द जोधपुर

    FAQs – क्यों गरब करे मन मूरख तू भजन

    Q1. 'क्यों गरब करे मन मूरख तू' भजन का क्या संदेश है?
    उत्तर: यह भजन अहंकार त्यागने और जीवन को गंगा माँ की कृपा से शुद्ध करने की प्रेरणा देता है।


    Q2. यह भजन किस देवता या देवी को समर्पित है?
    उत्तर: यह भजन माँ गंगा को समर्पित है, जो सनातन धर्म में मोक्षदायिनी और पाप हरने वाली मानी जाती हैं।


    Q3. इस भजन को कब गाया जाता है?
    उत्तर: यह भजन आमतौर पर गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी, हरिद्वार स्नान, या सामान्य भक्ति कार्यक्रमों में गाया जाता है।


    Q4. क्या इस भजन में आध्यात्मिक गहराई है?
    उत्तर: हां, यह भजन आत्मज्ञान, विनम्रता और माया के बंधनों से मुक्त होने का आध्यात्मिक संदेश देता है।


    Q5. क्या यह भजन यूट्यूब पर उपलब्ध है?
    उत्तर: हां, इस भजन के कई वर्जन भिन्न-भिन्न भजन गायकों द्वारा यूट्यूब पर गाए गए हैं, जैसे कि अनूप जलोटा, हंसराज रघुवंशी, आदि।

     

     

     

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