खाटू श्याम भजन

    हारे के सहारे श्याम, मुझे गले लगा लो ना भक्ति भजन लिरिक्स

    हारे के सहारे श्याम, मुझे गले लगा लो ना भक्ति भजन लिरिक्स

    हारे के सहारे श्याम, मुझे गले लगा लो ना भक्ति भजन लिरिक्स |

    Haare Ke Sahare Shyam Mujhe Gale Laga Lo Na Bhakti Bhajan Lyrics

     

    हारे के सहारे श्याम,
    मुझे गले लगा लो ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।

    तर्ज – एक आस तुम्हारी है।
    (राग – शिवरंजनी)


    मेरे श्याम तेरा डंका,
    सारे जग में बजता है,
    (तेरे दर पर आती है,
    दुनिया दीवानी,
    भरे सबकी झोली,
    ये शीश का दानी,
    मुझे भी प्रभु,
    एक पल तो निहारो,
    मेरे सुने जीवन को,
    तुम ही सवारो)
    मेरे श्याम तेरा डंका,
    सारे जग में बजता है,
    कहते है आंसू से,
    मेरा श्याम पिघलता है,
    मेरा श्याम पिघलता है,
    हालात तो देख मेरी,
    जरा मुझे बचा लो ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।


    गर आंख में आंसू है,
    तो किसको दिखाऊ मैं,
    (इन अश्को की धारा को,
    तुम ही सम्भालो,
    आकर कन्हैया,
    तुम मुझको बचा लो,
    नही आओगे तुम जो,
    बन कर खिवैया,
    मैं मर जाऊंगा,
    तेरे दर पर कन्हैया)
    गर आंख में आंसू है,
    तो किसको दिखाऊ मैं,
    अब छोड़ तेरे दर को,
    बता किस दर जाऊ मैं,
    बता किस दर जाऊ मैं,
    क्या नहीं संभालोगे,
    इतना तो बता दो ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।


    हारे के सहारे हो,
    तो क्यों नहीं आते हो,
    (मुझे तुझसे चाहत है,
    इतनी मुरारी,
    तेरे ही भरोसे पे,
    दुनिया हमारी,
    जो ना आये तो हम,
    ये समझेगे प्यारे,
    बस नाम के हो,
    हारे के सहारे)
    हारे के सहारे हो,
    तो क्यों नहीं आते हो,
    क्या तुम भी श्याम प्रभु,
    झूठा नाम कमाते हो,
    झूठा नाम कमाते हो,
    इस नाम का ही बाबा,
    वो फर्ज निभाओ ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।


    मैंने सुना था कि दर पर,
    सब एक बराबर है,
    (कितनो को तारा है,
    तुमने मुरारी,
    पर तेरे भगत थे,
    वो तेरे पुजारी,
    बराबर तो तब है,
    जब हमको भी तारो,
    वरना तू करता है,
    सौदा बिहारी)
    मैंने सुना था की दर पर,
    सब एक बराबर है,
    पर लगता है मुझको,
    दीनो का अनादर है,
    दीनो का अनादर है,
    ‘भानु’ को हराकर ये,
    बदनामी पाओ ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।


    हारे के सहारे श्याम,
    मुझे गले लगा लो ना,
    मैं हार के आया दरबार,
    मुझको भी सम्भालो ना।।

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